
बिलासपुर,,, जिले के बिल्हा थाना क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है! और इसमें पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत का एक नया चेहरा सामने आया है! सरकारी शराब भट्टी से खुलेआम शराब खरीदकर आसपास के इलाकों में सप्लाई की जा रही है! लेकिन जब मीडियाकर्मियों ने इसे उजागर करने की कोशिश की, तो पुलिस प्रशासन और थाना प्रभारी की ओर से अजीबोगरीब प्रतिक्रियाएं सामने आईं!

बिल्हा थाना क्षेत्र के दगोरी सरकारी शराब भट्टी से एक कोचिया शराब का जखीरा लेकर जाते कैमरे में कैद हुआ, और यह जानकारी मीडियाकर्मियों के पास आई! जब मीडियाकर्मियों ने इस अवैध धंधे के बारे में थाना प्रभारी को सूचित किया, तो उन्होंने उल्टा सवाल करते हुए पत्रकारों को यह पूछा, “क्या आपको शराब पकड़ने का अधिकार है?” यह बयान पुलिस की लापरवाही और अवैध शराब के कारोबार पर उनकी चुप्पी को और भी ज्यादा उजागर करता है!
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है! कि पुलिस और आबकारी विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से यह अवैध शराब का धंधा फल-फूल रहा है! सरकारी शराब भट्टी के कर्मचारियों की शह पर कोचियों को पेटी दर पेटी शराब सप्लाई की जा रही है! मीडियाकर्मियों द्वारा पकड़े गए तस्कर ने खुद स्वीकार किया कि वह शराब को परसदा निवासी भागवत कोसले के नाम पर उमरिया गाँव में पहुँचाने जा रहा था! इतना ही नहीं, तस्कर ने मीडियाकर्मियों को खरीदने की कोशिश की और यह तक कहा कि पुलिस और आबकारी विभाग के कर्मचारी इस पूरे धंधे में शामिल हैं!
आखिरकार, जब मीडियाकर्मियों ने थाना प्रभारी उमेश साहू को सूचना दी, तो उन्होंने बजाय कार्रवाई करने के उल्टा पत्रकारों से सवाल किया! “क्या आपको शराब पकड़ने का अधिकार है?” इस पूरे घटनाक्रम ने सवाल उठाया कि अगर खुद कानून ही पनहागार बन जाए, तो गुनहगारों के खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा? पुलिस और आबकारी विभाग के कर्मचारियों के अलावा कौन अवैध कारोबार को रोकेगा?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, परसदा के निवासी भागवत कोसले ने अवैध शराब के कारोबार के लिए 6-7 लोगों को तैनात किया है! और यह कोई नई बात नहीं है! भागवत को पहले भी शराब के मामलों में जेल भेजा जा चुका है! लेकिन इस बार पुलिस का ढीला रवैया यह बताता है! कि सिस्टम में कोई सुधार नहीं आ रहा है!
वहीं, मीडियाकर्मियों द्वारा शराब के जखीरे के बारे में सूचना देने और वीडियो दिखाने के बावजूद थाना प्रभारी ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे यह सवाल उठता है! कि क्या पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह से ढह चुका है? अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस का दावा सिर्फ कागजी साबित हो रहा है! जबकि सच्चाई यह है! कि उनका सिस्टम खुद इस कारोबार का हिस्सा बन चुका है!
अब सवाल यह उठता है! कि क्या पत्रकारों को कानून के तहत अवैध शराब पकड़ने का अधिकार है! या नहीं, लेकिन यह जरूर स्पष्ट है! कि जब पत्रकारों ने सूचना दी और वीडियो दिखाए, तब भी थाना प्रभारी के पास कार्रवाई करने का कानूनी अधिकार था! जिसे उन्होंने नजरअंदाज कर दिया! इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि विभाग की कथनी और करनी में कितना फर्क है! और पुलिस के अधीनस्थ कर्मचारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया है!
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