
बिलासपुर,,, जिले में इन दिनों कबाड़ का अवैध कारोबार करने वाले कबाड़ियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई चल रही है! जिले के अलग अलग थाना क्षेत्रों में कबाड़ियों पर लगाम लगाने के लिए कार्रवाई की जा रही है! दूसरी ओर नगर निगम द्वारा भी कुछ दिनों पहले सरकंडा क्षेत्र में कबाड़ का व्यापार करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर उनके अवैध कार्यों और निर्माण को धराशाई किया गया था!

लेकिन शहर के भीतर खासकर सिविल लाइन थाना क्षेत्र में कबाड़ियों का फैलना सिविल लाइन थाना पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है…!

क्योंकि क्षेत्र में दर्जनों कबाड़ियों द्वारा चोरी के लोहे और अवैध कबाड़ के काम को खुले आम अंजाम दिया जा रहा है! और थाने और कबाड़ियों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए कथित रूप से लाइजनिंग का काम संभालने वाले लंबे समय से थाना में कुंडली मारकर बैठे चर्चित सिपाही का नाम भी बताया जा रहा है…!

शहर के तालापारा क्षेत्र में कबाड़ियों की फौज एकत्रित हो गई है! रामा मैग्नेटो मॉल के पास से शुरू होकर बजरंग चौक तक पहुंचने वाली सड़क पर कबाड़ियों द्वारा सड़क पर सामान फैलाकर लोहे के बड़े बड़े ग्रिल छड़ और अन्य सामनों की अवैध कटिंग की जा रही है!

इतना ही नहीं सड़क के किनारे गोदाम बनाकर साइकिल गाड़ियों ऑटो तक काटने का काम कबाड़ी द्वारा किया जा रहा है! मुन्ना कबाड़ी के नाम से मशहूर कबाड़ी भारत चौक के पास छोटी सी टपरीनुमा दुकान बनाकर कबाड़ खरीद रहा है! लेकिन आगे वहीं कबाड़ी और उसका बेटा गोदाम बनाकर कटर के जरिए रातभर बड़ी बड़ी लोहे के सामानों को काटकर सुबह सुबह ऑटो, माजदा और अन्य गाड़ियों के माध्यम से ठिकाने लगा रहे है…!
शहर में लगातार बाइक, साइकिल, सड़कों को सुंदर बनाने नगर निगम द्वारा लगाएं गए रेलिंग ग्रिल के चोरी होने की सूचना सामने आते रहती है! लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिलता, लेकिन उन्हें ठिकाने लगाने का काम कबाड़ियों द्वारा बखूबी रूप से किया जा रहा है!
बड़ी बड़ी बोरियो में समानों को भरकर सुबह और देर शाम के वक्त ठिकाने लगाने का काम कबाड़ियों द्वारा किया जा रहा है…! यह मुमकिन नहीं कि क्षेत्र में पुलिस की जानकारी के बिना खुलेआम इस तरह अवैध कबाड़ के बड़े व्यवसाय को अंजाम दिया जा सके लेकिन थाना क्षेत्र की पुलिस आंख में पट्टी बांधकर क्षेत्र में कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम कर रही है…!
बारीकी से समझा जाएं तो अपराध, कबाड़ और नशा ये तीनों एक दूसरे से जुड़े हुए नजर आते है! क्योंकि अपराध करने वाले अधिक समय नशे के जाल में फंसे हुए होती है! तो उन्हें नशा करने के लिए पैसे की जरूरत होती है! लेकिन नौकरी के भरोसे नशा करना मुमकिन नहीं है! इसलिए कबाड़ चोरी का सहारा लेकर नशेड़ी नशे के लिए पैसे एकत्रित करते है…!
और नशे कबाड़ और अपराध की चकरी इसी तरह से घूमती रहती है! इन अवैध कबाड़ का काम करने वाले लोगों के निशाने पर बस्तियों में रहने वाले बच्चे अधिक होते है! जो आसानी से चंद पैसों के लिए दिनभर कबाड़ बिनकर लाते है! और धीरे धीरे चोरी का सामान खपाने के लिए इन कबाड़ियों का हथियार बन जाते है…!
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