पेंड्रारोड:-स्टोर की चाबी की लड़ाई पहुंची विशाखा कमेटी के दरवाजे एवं बार-बार विशाखा कमेटी का दुरुपयोग प्रशासन बेखबर एवं महिला के सामने नतमस्तक इस बार श्रीमती सुंदरी बाई के कंधे में बंदूक रखकर एवं जाति की जांच लंबित ,श्रीमती सरस्वती चंद्रा कार्यालय अधीक्षक (लिपिक) अधीन सीनियर सेक्शन इंजीनियर कार्य पेंड्रारोड के द्वारा यह लड़ाई स्टोर की चाबी इंचार्ज के द्वारा न देने से लेकर आज विशाखा कमेटी तक पहुंच गया।पिछले 8 वर्षों में कई रेलवे कर्मचारियों के ऊपर विशाखा कमेटी का दुरुपयोग किया जा चुका है उनके द्वारा कार्य क्षेत्र में अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों के ऊपर पहले मीडिया में जाकर उनके चरित्र को धूमिल करने का प्रयास करती है और जैसे ही प्रिंट मीडिया में नाम उछलता है अगला कदम विशाखा कमेटी के दरबार में होता है और प्रशासन हर बार उसके द्वारा लगाए गए आरोप को जांच कमेटी बैठा कर पल्ला झाड़ लेती है इनके द्वारा रेलकर्मियों के ऊपर पुलिस में रिपोर्ट अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार नियम आदि का दुरुपयोग करते हुए मानसिक एवं आर्थिक प्रताड़ना का शिकार बनाया जाता है।इस कमेटी द्वारा महिला कमेटी होने के कारण एक पक्षीय कार्यवाही करते हुए महिला अपना एक व्यू रचना के साथ कर्मचारी के ऊपर अनुशासन एवं अपील तथा महिला उत्पीड़न को साबित करने में हमेशा सफल हो जाती है जैसा कि पहले भी इनके द्वारा कई केस में किया जा चुका है।
इसका वर्तमान में एक उदाहरण श्री चंद्रशेखर झा ट्रैकमेंटेनर अधीन सीनियर सेक्शन इंजीनियर रेलपथ पेंड्रारोड जो कि एक सामान्य से विवाद यात्रा भत्ता को लेकर हुआ था जिसमें इस महिला के द्वारा थाना गौरेला में रिपोर्ट कर उसे जेल में बंद करवाने का कुकृत्य किया गया था एवं इस विवाद को विशाखा कमेटी में ले जाकर उनका स्थानांतरण पेंड्रा रोड से मनेंद्रगढ़ कर दिया गया जो कि एक पक्षीय कार्यवाही थी।
दूसरा उदाहरण श्री ए. के. पांडेय तत्कालीन सहायक मंडल इंजीनियर के ऊपर भी इसने 2013 में महिला थाना बिलासपुर एवं अनुसूचित जनजाति थाना बिलासपुर में रिपोर्ट दर्ज किया उसके बाद व्यक्तिगत स्वार्थ जो इन्हें सिद्ध करना था उसके पूरा हो जाने के बाद ए. के. पांडेय का केस वापस ले लिया इस प्रकार का ब्लैकमेल करना इनकी पुरानी रणनीति के तहत अक्सर देखा जा रहा है।
क्या विशाखा कमेटी को यह बात नहीं मालूम कि इस महिला कर्मचारी के साथ ही सभी का विवाद क्यों होता है क्या सभी व्यक्ति गलत है नहीं क्योंकि आंख बंद कर यह कमेटी महिला होने का फायदा देकर रेल कर्मचारियों पर अन्याय कर रही है यह रेलवे विशाखा कमेटी को सोचने पर विवश होना ही पड़ेगा।यह महिला बहुत ही चालाकी से रेल प्रशासन को धोखा दे रही है इस बार सरस्वती देवी ने पहले धरना देकर प्रिंट मीडिया में अपना माहौल बनाया इसके बाद सुंदरी बाई खलासी अधीन सीनियर सेक्शन इंजीनियर कार्य पेंड्रा रोड के कंधे में बंदूक रखकर यह कृत्य को अंजाम देने की फिराक में है जैसा कि सूत्रों के द्वारा जानकारी प्राप्त हो रही है।रेल प्रशासन की आंख कब खुलेगी या महिला कमेटी कब पुराने केसों की तह में जाकर संज्ञान में आएगी इस प्रकार कितने मासूम कर्मचारी इस महिला का शिकार बनते रहेंगे यह विषय सोचने पर विवश कर रहा है।


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