
बिलासपुर,,, 2047 तक के विजन और नई शिक्षा नीति का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार को अब गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चों की मुफ्त शिक्षा दो साल में ही बोझ लगने लगी… यही वजह है! कि शिक्षा माफिया के दबाव के चलते सरकार ने आत्मानन्द स्कूलों में नई शिक्षा नीति के मूल एलकेजी और यूकेजी को बन्द करने का निर्णय ले देश के भविष्य और गुरुओं के जीवन को मझधार में छोड़ दिया… इससे आर्थिक अभाव के कारण जहां 50 फीसदी से ज्यादा बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे वहीं इन्हें पढ़ाने वाले गुरुजी बेरोजगार हो जाएंगे, निजी स्कूलों की फिर बल्ले- बल्ले हो जाएगी जिसके लिए ये सारा खेल खेला गया है!
देश के प्रधानमंत्री ने खुद एलकेजी और यूकेजी को नई शिक्षा नीति का रीढ़ बताया था! पर छत्तीसगढ़ की ने सरकार फंड का टोटा बता आत्मानन्द स्कूलों से एलकेजी और यूकेजी को बन्द करने का फरमान जारी कर दिया… यानि अब एलकेजी और यूकेजी की पढ़ाई केवल और केवल निजी स्कूलों में ही होगी आपको भारी भरकम फीस देकर अपने बच्चों को निजी स्कूल भेजना होगा सरकार ने गरीबी के चलते कहे या निजी स्कूलों के दबाव के चलते कहे बीच सत्र में 1 माह के अंदर जिले के आत्मानन्द स्कूलों से एलकेजी और यूकेजी को बन्द करने का फरमान जारी कर दिया है!
उनने बनाया बिगाड़ ये रहे…
कांग्रेस शासनकाल की तमाम योजनाओं में स्वामी आत्मानन्द स्कूल की योजना सबसे हिट रही। जिन स्कूलों की टोटल स्ट्रेंथ 100 का आंकड़ा नही छू पा रही थी! वहां एडमिशन के लिए मारामारी इस कदर रही कि मंत्री नेताओ के सिफारिश के लेटर आने लगे इतने आवेदन आये की लॉटरी निकालना पड़ा। कांग्रेस सरकार ने निजी स्कूल संचालको की हालत पस्त कर दी, जिन निजी स्कूलों में 2 – ढाई हजार विद्यार्थियों की स्ट्रेन्थ थी वहां के विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ आत्मानन्द स्कूलों में प्रवेश लेने के कारण स्ट्रेन्थ आधे से भी कम हो गई। ट्रिपल इंजन के सर्जन अब आत्मानंद स्कूल की आत्मा निजी स्कूलों में ट्रांसफर करने कवायद कर रही। क्योकि सरकार का दावा ही है कि हमने बनाया है हम ही सवारेंगे।
डीएमएफ फंड से एलकेजी और यूकेजी के टीचरों को वेतन का भुगतान किया जाता था। इस पर रोक लगने के कारण ये संकट आया है। शासन के आदेशानुसार इस वर्ष के एक्जाम के बाद इसे बन्द कर दिया जाएगा, अब अभिभावकों को अपने बच्चों को निजी स्कूलों में एलकेजी, यूकेजी की पढ़ाई करानी होगी।
विजय टांडे
जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर
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