
गरियाबंद,,, जिले के देव भोग थाना क्षेत्र स्थित उरमाल गांव में आयोजित एक मनोरंजन कार्यक्रम अब प्रशासन के लिए गंभीर सवालों का विषय बन गया है! छह दिवसीय ओपेरा आयोजन के दौरान मंच पर अशोभनीय प्रस्तुतियों और दर्शकों के आपत्तिजनक व्यवहार के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है!
अनुमति के बाद हुआ आयोजन, बना सवाल…
जानकारी के अनुसार उरमाल गांव की युवा समिति ने मैनपुर एसडीएम कार्यालय से अनुमति लेकर 6 दिवसीय ओपेरा कार्यक्रम आयोजित किया था! आयोजन के लिए ओडिशा से कलाकार बुलाए गए थे! आरोप है! कि कार्यक्रम के दौरान मंच पर मर्यादा के विपरीत प्रस्तुतियां दी गईं… जिन पर दर्शकों की प्रतिक्रिया भी आपत्तिजनक रही!
वायरल वीडियो में मैनपुर एसडीएम तुलसी दास मरकाम कार्यक्रम स्थल पर मौजूद दिखाई दे रहे हैं! वहीं दो पुलिसकर्मी भी मंच के पास अनुचित व्यवहार करते नजर आ रहे हैं! इन दृश्यों के सामने आने के बाद मामला केवल आयोजकों तक सीमित न रहकर प्रशासनिक जिम्मेदारी और निगरानी पर भी सवाल खड़े कर रहा है!
रात 11 से तड़के 3 बजे तक चला कार्यक्रम…
बताया जा रहा है! कि 8 और 9 जनवरी की रात बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल हुए… 9 जनवरी को एसडीएम के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने की भी पुष्टि हुई है! वीडियो फुटेज में देर रात तक मंचीय गतिविधियां चलते हुए देखी जा सकती हैं! जहां पंडाल में अधिकारी, पुलिसकर्मी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद थे!
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में…
10 जनवरी को वीडियो वायरल होने के बाद देवभोग पुलिस ने कार्रवाई शुरू की! थाना प्रभारी फैजुल शाह के अनुसार, वीडियो में नजर आए दो पुलिसकर्मियों को तत्काल लाइन अटैच कर दिया गया है! वहीं आयोजन से जुड़े देवेंद्र राजपूत, गोविंद देवांगन, नरेंद्र साहू और हसन डाडा के खिलाफ बीएनएस की धारा 296 (3)(5) के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया… जिन्हें बाद में मुचलके पर रिहा किया गया!
SDM की भूमिका की जांच की मांग…
मामले में एक स्थानीय युवक द्वारा थाने में लिखित शिकायत दी गई है!जिसमें कार्यक्रम की अनुमति देने और मौके पर मौजूद रहने को लेकर एसडीएम की भूमिका की जांच की मांग की गई है! बताया जा रहा है! कि आयोजन की अनुमति 10 जनवरी तक थी! लेकिन विवाद बढ़ने के बाद उसी दिन कार्यक्रम को बंद करवा दिया गया!
प्रशासनिक जवाबदेही पर खड़े हो रहे सवाल…
यह मामला अब केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है! बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है! कि अनुमति देने, निगरानी रखने और मर्यादा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी! वायरल वीडियो ने प्रशासनिक व्यवस्था और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की भूमिका को कठघरे में ला खड़ा किया है!
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