बिलासपुर के नेहरू नगर में 60 साल पुराने सरकारी सामुदायिक भवन को जमींदोज करने के मामले में अब कानून का हंटर चल चुका है। यह मामला महज़ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रहा है। मुख्य आरोपी मोहम्मद अली पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है और अब पुलिस ने प्रशासन के उन अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है, जिनकी कलम से सरकारी जमीन पर भू-माफिया का कब्जा मुमकिन हुआ।

नेहरू नगर में करोड़ों की सरकारी संपत्ति को मलबे में तब्दील करने के इस महाघोटाले पर अब कानून की सख्ती साफ नजर आ रही है। मुख्य आरोपी मोहम्मद अली के खिलाफ सिविल लाइन थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस ने इस पूरे मामले की कड़ाई से जांच शुरू कर दी है।सिविल लाइन पुलिस ने इस मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए न सिर्फ आरोपी मोहम्मद अली, बल्कि इस खेल में शामिल सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत , तहसीलदार प्रकाश साहू और पटवारी सुरेश सिंह को भी नोटिस जारी कर सीधे तलब कर लिया है। पुलिस अब उन दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है, जिनके दम पर आरोपी मोहम्मद अली ने इस सरकारी भूमि पर अपना दावा ठोका था। जांच इस दिशा में आगे बढ़ रही है कि आखिर सरकारी तंत्र की नाक के नीचे करोड़ों का यह खेल कैसे मुमकिन हुआ।
जब सरकारी जमीन की सुरक्षा करने वाले ही आंखें मूंद लें, तो भू-माफियाओं के हौसले बुलंद होना लाजिमी है। लेकिन सिविल लाइन पुलिस के इस कड़े रुख और अफसरों को तलब किए जाने के बाद अब बिलासपुर के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। जांच की आंच में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि और कौन-कौन से रसूखदार चेहरे इसमें बेनकाब होते हैं।
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