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24 Jul 2026, Fri

नागलोक फर्जी मुआवजा कांड का तिलिस्म खुलने लगा, नोटरी-लिपिक के बयानों से तहसील में हड़कंप, मौका निरीक्षण और बिसरा जांच पर गंभीर सवाल, अब लू, आगजनी और बारिश में मकान ढहने के मुआवजा प्रकरणों की फाइलें भी जांच के दायरे में आने की चर्चा….

बिलासपुर,,,,, नागलोक फर्जी मुआवजा कांड में नित नए खुलासे हो रहे है! तहसील में सन्नाटा पसरा है! कोई दिल्ली तो कोई अवकाश में बताए जा रहे है! जो है! उनकी केवल गाडियां नज़र आ रही…. चेम्बर से साहेब नदारद है! आरोप है! कि नियम के मुताबिक एक भी प्रकरण में न मौका निरीक्षण का उल्लेख है! और न ही बिसरा जांच न कराने का जो बेहद ग़म्भीर है! अफसर और स्टाफ की चिंता का कारण यह है! कि यदि बारिश में मकान धसकने, लू और आग से जलने के मुआवजे के फर्जीवाड़े की फाइलें फड़फड़ाई तो क्या होगा… इसलिए मामले को दबाने पूरी ताकत लगाई जा रही है! मरी के करोड़ो के मुआवजे के इस फर्जीवाड़े को बेहद शातिराने ढंग से अंजाम देने की बाते सामने आ रही है! अफसर से लेकर दलालों तक पूरे सिंडिकेट का मुखिया साहब के ड्राइव्हर को बताया जा रहा….

गुरुवार को हुआ नोटरी का बयान….

गुरुवार को पुलिस अफसरों और कर्मचारियों के तहसील दफ्तर पहुँचने से हड़कम्प मचा रहा…. वीडियोग्राफी के साथ एक नोटरी का बयान दर्ज किया गया…. अधिवक्ता नोटरी ने बताया कि हॉ ये शपथपत्र उन्होंने बनाये है! पुलिस कर्मियों ने नोटरी के रजिस्टर की प्रति भी जब्त की जिसमे इन फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के दस्तखत है!

एक बाबू के बयान से मची खलबली….

बताया जा रहा… कि एक लिपिक ने पुलिस को दिए गए…. बयान में ग़म्भीर जानकारी देसारी पोल पट्टी लाकर रख दी है! इसके बाद से सब दहशत में है!

और पटवारी का साइन भी फर्जी….

सरकण्डा के एक फर्जी मुआवजा प्रकरण में पटवारी के साइन को फर्जी होना बताया जा रहा है!

पुलिस ने सातों को लौटाया….

पुलिस ने तहसील और एसडीएम दफ्तर की जिन 7 कर्मचारियों को बयान दर्ज कराने तलब किया था…. उन्हें बिना बयान दर्ज किए बैरंग लौटा दिया गया…. कि आप शुक्रवार शाम आइये….

क्या है बिसरा जाँच….

बिसरा (विसरा) रिपोर्ट से किसी संदिग्ध मौत के असली कारण का पता चलता है! कि मृतक के शरीर में जहर, ड्रग्स या अल्कोहल किस चीज की मौजूदगी है! यह रिपोर्ट पोस्टमार्टम के बाद आंतरिक अंगों की रासायनिक जांच से तैयार होती है! पर एक भी केस में बिसरा जांच का उल्लेख या रिपोर्ट न होने की बात सामने आ रही है! यानि किसी भी मृतक का बिसरा जांच कराया ही नही गया…. ये बात सामने आ रही है! जो बेहद ग़म्भीर है!

शातिराना खेल,टारगेट में हिदू….

तहसील कार्यालय के अंदरखाने से मिली जानकारी की माने तो पूरा खेल हिदू मृतको की बॉडी से किया गया है! क्योकि हिन्दू धर्म मे शवो को जलाने की प्रथा जो है! जिन धर्मो में शवो को दफनाया जाता है! उनके एक भी केस नही है! क्योकि लफड़ा होने पर शव को कब्र से निकलवाकर जांच कराने का खतरा था…. इसलिए सारा खेल दिमागीय कसरत के साथ खेला गया है!

तब मारते थे… सरकारी मुआवजे के लिए हथौड़ा….

मुआवजे के फर्जीवाड़े का ये खेल मृतक के क्रिया कर्म के बाद आगे बढाया जाता था…. ताकि कोई लफड़ा ही न रहे…. बॉडी जला दी गई…. अंतिम संस्कार हो गया…. अब कोई खतरा नही तब मृतक के परिजन के मुआवजे के प्रकरण की फाइल आगे बढ़ाई जाती थी….

सरकार को सवा 17 करोड़ का चूना….

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सर्पदंश (सांप काटने) के नाम पर 17.24 करोड़ का फर्जी मुआवजा घोटाला सामने आया है! मामला मरी का माल सिंडिकेट का है! जिसने  सामान्य मौतों को सांप काटने से हुई मौत बताकर सरकारी मुआवजा हड़पा गया….

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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